सीएम भजनलाल की होली से पहले बड़ी घोषणा, खुशी से झूमे धनिया किसान-व्यापारी

जयपुर.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने होली के अवसर पर हाड़ौती के किसानों और व्यापारियों को बड़ी सौगात दी है। शुक्रवार को विधानसभा में उन्होंने मार्केटिंग कॉस्ट को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में धनिये के व्यापार को प्रोत्साहन और मार्केट लिंकेज बढ़ाने के उद्देश्य से मंडी शुल्क 1.60 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत तथा आढ़त की दर 2.25 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करने की घोषणा की।

सीएम भजनलाल के इस निर्णय से हाड़ौती क्षेत्र में धनिये का रकबा और कारोबार बढ़ने की संभावना है। साथ ही, धनिया प्रोसेसिंग की नई इकाइयों के लिए रास्ता साफ होगा और मौजूदा इकाइयों को भी बड़ी राहत मिलेगी। इससे क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।

धनिया कारोबारियों ने घोषणा का किया स्वागत
धनिया कारोबारियों ने मंडी शुल्क और आढ़त में कमी की घोषणा का स्वागत किया है। अब तक गुजरात और मध्यप्रदेश में धनिये पर कम टैक्स होने के कारण हाड़ौती का धनिया वहां की मंडियों में जा रहा था, जिससे स्थानीय कारोबार प्रभावित हो रहा था। नई दरें लागू होने से प्रतिस्पर्धा की स्थिति सुधरेगी।

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प्रदेश में कोटा संभाग उत्पादन में अव्वल
उद्यान विभाग के अनुसार, प्रदेश में धनिया उत्पादन में कोटा संभाग पहले स्थान पर है। राज्य के कुल धनिया उत्पादन में हाड़ौती की हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत है। निर्यात गुणवत्ता के धनिये के उत्पादन को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के साझा कार्यक्रम के तहत वर्ष 2005 में कृषि निर्यात जोन (एईजेड) बनाया गया था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह योजना प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप, धनिये का रकबा वर्ष दर वर्ष घटता गया।

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यहां के धनिये की विशेष तासीर
हाड़ौती और चित्तौड़गढ़ जिले के साथ-साथ मध्यप्रदेश की भूमि में उत्पादित धनिये में विशेष सुगंध पाई जाती है। देश के अन्य राज्यों में उत्पादित धनिये में यह गुणवत्ता नहीं मिलती। हाड़ौती संभाग के धनिया दाने का वजन अपेक्षाकृत कम होता है, जो इसकी एक विशेष पहचान है। गुजरात में उत्पादित धनिये में यह गुणवत्ता नहीं पाई जाती।

आवाज बना ‘अपनी उपज-अपना उद्योग’ अभियान
राजस्थान पत्रिका ने ‘अपनी उपज-अपना उद्योग’ अभियान के तहत धनिये का उत्पादन बढ़ाने और प्रोसेसिंग उद्योगों को बढ़ावा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया। अभियान के दौरान लगातार समाचार प्रकाशित कर मध्यप्रदेश और गुजरात की तुलना में राजस्थान में अधिक मंडी शुल्क और आढ़त का मुद्दा प्रमुखता से सामने रखा गया।

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पत्रिका का आभार जताया
राजस्थान पत्रिका की ओर से धनिये पर मंडी शुल्क और आढ़त कम करने की मांग को लेकर निरंतर समाचार प्रकाशित किए गए। पत्रिका के सार्थक प्रयासों से ही सरकार ने यह निर्णय लिया है। इसके लिए राजस्थान पत्रिका का आभार। मुख्यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का भी धन्यवाद।
– महावीर गुप्ता, महासचिव, राजस्थान एसोसिएशन ऑफ स्पाइसेस

हाड़ौती अंचल में धनिया बुवाई के आंकड़े
  वर्ष – हैक्टेयर
2012-13 156024
2013-14 178210
2014-15 242870
2015-16 193759
2016-17 126775
2017-18 97738
2018-19 87965
2019-20 72532
2021-22 87596
2022-23 62032
2023-24 43594
2024-25 30558।

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